हिन्दुस्तान हमारा प्यारा,हिन्दुस्तान हमारा।
जहां गंगा यमुना सरस्वती की बहती कल कल धारा।।
विंन्ध हिमांचल ऋष्यमूक हिमगिर ने मुकुट संवारा ।
हिन्दुस्तान हमारा प्यारा,हिन्दुस्तान हमारा।।
गंगा यमुना के कछार में फसलें लहरायें ।
काश्मीर केशर की क्यारी खुशबू फैलायें ।।
असम चाय बागानों में मुस्काएं जन मन हमारा।
हिन्दुस्तान हमारा प्यारा हिन्दुस्तान हमारा ।।
वीर सिपाही बना हिमालय अकड़ा खड़ा हुआ है।
भारत माता के चरणों में सागर पड़ा हुआ है।।
पूरब की आभा से पश्चिम जल भुल रहा बिचारा।
हिन्दुस्तान हमारा प्यारा हिन्दुस्तान हमारा ।।
प्रथम सभ्यता की किरणों से जग को गम दिखलाया ।
तंत्र मंत्र आराधन प्राणायाम योग सिखलाया ।।
दिया दशमलव अंकशास्त्र को जग का गणित संवारा।
हिन्दुस्तान हमारा प्यारा हिन्दुस्तान हमारा ।।
वाल्मीकि तुलसी कबीर मीरा की मीठी वानी।
रामायण गीता सुखसागर गाते अमर कहानी।।
गुरूगोविन्द की रीति नीति का है पालन हारा।
हिन्दुस्तान हमारा प्यारा हिन्दुस्तान हमारा ।।
इसके चरणों में नत मस्तक हम बालक नादान।
इसके लिए समर्पित तन मन धन वैभव सम्मान।।
इसकी खुशहाली गौरव को सब कुर्बान हमारा ।
हिन्दुस्तान हमारा प्यारा हिन्दुस्तान हमारा ।।
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Saturday, September 13, 2008
Tuesday, July 15, 2008
मां सरस्वती की वन्दना
सिद्धि ज्ञान ध्यान धवल प्रकाश पुन्ज,
बुद्धिम् प्रदाम शक्ति धाम माता शारदे ।
हंस पै सवार वीणा पाणि कमलासनी मां,
सत्यशील दयावान जय जय माता शारदे ।।
चरणों में तेरे आया माता ज्ञान दायनी मैं,
भर दे प्रकाश बुद्धि तेज को संवार दे ।
कलम बखान करें तेरा गुणगान करें,
बुद्धि ज्ञान दायनी कृपालु माता शारदे ।।
जाति धर्म भेदभाव निन्दा औ बुराई त्याग,
रीति नीति प्रीति प्रेम दे दे माता शारदे ।
जलन कपट छल छद्म के न व्यापै भाव,
निष्काम सत्यता जगा दे माता शारदे ।
सुख शान्ति करूणा की निश्छल चेतना के,
सरस स्वछन्द बन्द देदे माता शारदे ।
पग न विलग होय सत पथ गामी बनूं,
सिन्धु सा अपार प्यार दे दे माता शारदे ।।
निःस्वार्थ राष्टीय भावना से ओत प्रोत ,
कह सकूं गीत ग़ज़ल छन्द माता शारदे ।
मातृ भूमि भारत के यश का बखान करूं,
दे दे शक्ति भक्ति ज्ञान माता शारदे ।।
-. मोहन तिवारी आनन्द
बुद्धिम् प्रदाम शक्ति धाम माता शारदे ।
हंस पै सवार वीणा पाणि कमलासनी मां,
सत्यशील दयावान जय जय माता शारदे ।।
चरणों में तेरे आया माता ज्ञान दायनी मैं,
भर दे प्रकाश बुद्धि तेज को संवार दे ।
कलम बखान करें तेरा गुणगान करें,
बुद्धि ज्ञान दायनी कृपालु माता शारदे ।।
जाति धर्म भेदभाव निन्दा औ बुराई त्याग,
रीति नीति प्रीति प्रेम दे दे माता शारदे ।
जलन कपट छल छद्म के न व्यापै भाव,
निष्काम सत्यता जगा दे माता शारदे ।
सुख शान्ति करूणा की निश्छल चेतना के,
सरस स्वछन्द बन्द देदे माता शारदे ।
पग न विलग होय सत पथ गामी बनूं,
सिन्धु सा अपार प्यार दे दे माता शारदे ।।
निःस्वार्थ राष्टीय भावना से ओत प्रोत ,
कह सकूं गीत ग़ज़ल छन्द माता शारदे ।
मातृ भूमि भारत के यश का बखान करूं,
दे दे शक्ति भक्ति ज्ञान माता शारदे ।।
-. मोहन तिवारी आनन्द
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